कविता पण बालीश आहे तशी......
ऎ चांद बेखबर,
तुझे लग रहा है डर.
तुझसेभी खुबसुरत,
मेरा है हमसफ़र.
तु मस्त था अब तक,
आसमा के आगन मे,
ना थी कोई सीमा,
ना कोई speed breaker ..
सबने नापी खुबसुरती,
तुझसे अपने चांद की.
मेरा चांद दुनिया मे
खुबसीरत मगर..........
D shivaनी
Nagpoor

No comments:
Post a Comment